कांवर यात्रा के मार्ग पर दुकानों व भोजनालयों आदि पर दुकानदार का नाम लिखवाने के संबंध में जदयू के राष्ट्रीय महासचिव सह प्रवक्ता राजीव रंजन का वक्तव्य

arun raj
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पटना:- जदयू के प्रदेश महासचिव व प्रवक्ता श्री राजीव रंजन ने आज कहा है कि हिन्दू धर्म में कांवर यात्रा सिर्फ यात्रा नहीं बल्कि एक तपस्या है। जिसमें पवित्रता का बेहद ख्याल रखा जाता। लेकिन इसके बावजूद कांवर यात्रा के मार्गों पर लगाए जाने वाले दुकानों व भोजनालयों आदि पर दुकानदार का नाम लिखवाने के निर्णय को सही नहीं कहा जा सकता।
जदयू महासचिव ने कहा कि बिहार में भी कांवर यात्रा धूम-धाम से निकाली जाती है, इसमें सभी जाति-धर्मों के लोगों का सहयोग रहता है। यात्रा के मार्गों पर सभी जाति-धर्मों के लोग कांवड़ियों की सेवा करने के लिए तत्पर रहते हैं और कांवर यात्रा में शामिल लोग भी सेवा करने वालों का जाति-धर्म नहीं पूछते। एक तरह से महादेव की पूजा में जाति-धर्म गौण हो जाता है।    

उन्होंने कहा कि लेकिन दुकानों/भोजनालयों पर नाम लिखवाने से सामाजिक विषमता बढ़ने का खतरा है, जिसे विपक्षी दल हवा देने के लिए तैयार खड़े हैं। नाम देख कर लोग केवल दूसरे धर्मों के लोगों से ही नहीं बल्कि दलित-पिछड़े व अतिपिछडे समाज के लोगों से भी सामान खरीदने से कतरायेंगे। इससे कांवड़ियों की परेशानी भी बढ़ेगी और उनकी सेवा करने को उत्सुक लोग भी मायूस होंगे।

उन्होंने कहा कि लोगों को भूलना नहीं चाहिए कि बिहार-यूपी जैसे राज्यों में जाति एक कड़वी सच्चाई है। इसीलिए इस निर्णय से हिन्दू-मुस्लिम समेत समाज का हर अंग प्रभावित होगा। इसलिए सरकार को इस नियम को लागू करवाने के बजाये सरकारी स्तर पर विशेष भोजनालय, विश्राम स्थल, पूजन सामग्री वितरण स्थल आदि का निर्माण करवा कर उनके उपयोग को लोगों की इच्छा पर छोड़ देना चाहिए। जिसे जहां से सुविधा लेनी हो वह वहां से ले।

विपक्ष की पोल खोलते हुए जदयू प्रवक्ता ने कहा कि आज विपक्ष इस विषय पर राजनीतिक रोटियां सेंकने का भरपूर प्रयास कर रहा है, जबकि हकीकत में यह कानून उन्होंने ने ही बनाया हुआ है। इस कानून को 2006 में लागू किया गया था उस समय यूपी में स्व. मुलायम सिंह यादव की सरकार थी और केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए सरकार थी। इसमें साफ कहा गया था कि सभी दुकानदारों, ढाबा मालिकों को अपने नाम के साथ-साथ पता और लाइसेंस नंबर भी होना चाहिए। और आज इनका इस विषय पर छाती पीटना इनके दोमुहेंपन को दिखाता है।

उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ऐसे भी कई गलत कानूनों को रद्द या बदल चुकी है। उन्हें चाहिए कि इस कानून में भी फेरबदल कर इसे लागू करें, जिससे समाजिक सद्भाव भी बना रहे और कानून का उद्देश्य भी पूरा हो जाए।

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