50 प्रतिशत महिला आरक्षण से शुरू हुई सामाजिक क्रांति, विकास का नया माॅडल बना पंचायती राज – डा0 अनुप्रिया यादव

arun raj
arun raj
4 Min Read


पटना :- जद (यू) प्रदेश प्रवक्ता डा0 अनुप्रिया यादव ने सोशल मीडिया संवाद करते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में बिहार ने मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में गांव, गरीब, महिला और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण की वह मिसाल पेश की है, जिसने शासन के केंद्र को सचमुच जनता के दरवाजे तक पहुँचा दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शी सोच और संवेदनशील नीति ने बिहार के गांवों को विकास, सशक्तिकरण और स्वाभिमान के नए युग में प्रवेश कराया है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सत्ता के विकेंद्रीकरण को सशक्त बनाते हुए पंचायतीराज संस्थाओं को न केवल अधिकार दिए, बल्कि उनमें भागीदारी की सच्ची भावना भी जगाई। वर्ष 2006 एवं 2007 में उन्होंने पंचायती राज और नगर निकायों में महिलाओं को 50ः आरक्षण देकर सामाजिक क्रांति की शुरुआत की। जिन महिलाओं की दुनिया कभी चूल्हे-चैके तक सीमित थी, उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नए सपने देखने और उन्हें साकार करने का अवसर दिया। आज यही महिलाएं मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य के रूप में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और आर्थिक उन्नति के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मानना रहा है कि गांव तभी सशक्त होगा जब उसका नेतृत्व सशक्त होगा। ग्राम प्रशासन को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए उन्होंने हर पंचायत को पंचायत भवन की सौगात दी। आधुनिक सुविधाओं से युक्त इन भवनों में इंटरनेट, आरटीपीएस, बैंकिंग, बायोमीट्रिक उपस्थिति, स्वास्थ्य व कृषि सेवाएँ, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, डाकघर, आंगनबाड़ी, कंप्यूटर प्रशिक्षण और पुस्तकालय जैसी सेवाएँ एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई गई हैं।
डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार को एक नई पहचान दी। पंचायत भवनों में बायोमीट्रिक उपस्थिति, ग्राम स्वराज पोर्टल, जियो टैगिंग और रीयल टाइम माॅनिटरिंग सिस्टम जैसी पहल ने शासन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया। भ्रष्टाचार पर लगाम लगी और जनता का विश्वास शासन में और गहरा हुआ। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की भावना को पंचायत स्तर तक पहुँचाया। महिलाओं, दलितों, पिछड़ों, अत्यंत पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण व्यवस्था को और सुदृढ़ किया गया। स्वयं सहायता समूहों को पंचायतीराज संस्थाओं से जोड़कर ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक और निर्णयात्मक शक्ति दोनों प्रदान की गईं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना, इंदिरा आवास योजना, कन्या उत्थान योजना और मनरेगा जैसी योजनाओं को पंचायतों के माध्यम से प्रभावी ढंग से लागू किया गया। करोड़ों रुपये सीधे पंचायत खातों में भेजे जाने से न केवल वित्तीय पारदर्शिता बढ़ी, बल्कि विकास की गति भी तेज हुई।
 मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह सुनिश्चित किया कि ‘‘हर गांव शहर बने, हर नागरिक सशक्त बने।’’ उनके नेतृत्व में गांव अब केवल विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि सुशासन का केंद्र बन चुके हैं। आज बिहार की महिलाएं, युवाएँ और पंचायत प्रतिनिधि अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर पहले से कहीं अधिक सजग और सक्रिय हैं।

Share this Article