पटना संसदीय क्षेत्र का इतिहास और उनके सांसद

arun raj
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पटना जिला सुधार समिति के महासचिव राकेश कपूर ने परिसीमन पूर्व और वर्तमान पटना व पटना संसदीय निर्वाचन क्षेत्र की राजनीतिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया है कि पटना संसदीय क्षेत्र से चुने जाने वाले कांग्रेस के सांसदों में सर्वप्रथम श्री सारंधर सिंह और श्रीमती रामदुलारी सिन्हा जी रहीं। बाद के दिनों में कम्युनिस्टों से कांग्रेस के गठबंधन के कारण श्री रामअवतार शास्त्री लगातार तीन बार सांसद चुने गये। मिलनसार और जमीनी नेता होने के कारण वे काफी लोकप्रिय सांसद रहे।

जनता दल के रामकृपाल यादव भी भी लोकप्रिय सांसद रहे। भाजपा के प्रो.शैलेंद्र नाथ श्रीवास्तव ने सांसद के रूप में काफी लोकप्रिय रहे। अपनी मिलनसार छवि की वजह से उन्हें जनता का भरपूर प्यार और सम्मान मिला।

लेकिन इसी पार्टी के दूसरे सांसद सिने अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा की पहचान लापता सांसद की रही। जनता के लिए वे दुर्लभ रहे। उनका कार्यकाल बेहद बुरा रहा। वे लगातार क्षेत्र से लापता रहे और जनता को खामोश करते रहे। मैंने तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती मीरा कुमार जी को पत्र लिख कर इनके बारे में जानना चाहा। मीडिया में इस बात की चर्चा भी हुई थी। बाद के दिनों में शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस में भी शामिल हुए और इस क्षेत्र से प्रत्याशी बन कर पराजित हुए।

कांग्रेस ने काफी समय बाद प्रख्यात चिकित्सक डा.चन्देश्वर प्रसाद ठाकुर को क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया और चुनाव जीतकर सांसद बने। उन्होंने पटना शहर जिला कांग्रेस पार्टी द्वारा पटना शहर में आयोजित जनसंपर्क पदयात्रा के दौरान जनसंवाद कर क्षेत्र में अपनी अच्छी पैठ बनाई और लोकप्रिय हुए। जिसका लाभ इन्हें दलबदल कर भाजपा में जाने पर मिला।

दुर्भाग्य से कांग्रेस अपने किसी कार्यकर्ता को चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाकर सिने अभिनेताओं को चुनाव लड़ाती रही। चाहे भोजपुरी अभिनेता कुणाल सिंह हो या शत्रुघ्न सिन्हा या फिर शेखर सुमन — ये सभी विफल रहे।

वर्तमान सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद हैट्रिक लगाने की चाहत के साथ पुन: चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन ये भी क्षेत्र में जनसंपर्क नहीं करते। इनके पार्टी के कार्यकर्ताओं की भी यही शिकायत है। रविशंकर प्रसाद अहंकारी हैं और जनता की इच्छाओं का आदर भी नहीं करते हैं। वे जन सुलभ भी नहीं हैं।

कांग्रेस ने काफी अरसे के बाद अंशुल अभिजीत को अपना प्रत्याशी बनाया है। वे बिहार की पूर्व मंत्री स्व. सुमित्रा देवी जी के पौत्र व पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. बाबू जगजीवन राम जी के नाती हैं। वे पूर्व लोकसभाध्यक्ष श्रीमती मीरा कुमार जी के पुत्र है। इनके पिता श्री मंजुल कुमार का लालन पालन इसी पटना की धरती पर हुआ है। वे पटना कॉलेज के छात्र रहे हैं। वे इन दिनों सुप्रीम कोर्ट में वकालत करते हैं।

अंशुल अभिजीत मृदु भाषी होने के साथ साथ संवेदनशील और बुद्धिमान भी हैं। इन्होंने कॉलेज की पढाई सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली से पढाई की है और कैंब्रिज विश्वविद्यालय से पीएचडी किया है। इनका पुश्तैनी घर तारामंडल के ठीक मंदिरी मोहल्ले में है। अंशुल की पत्नी का नाम मनिका सिंह है। वो हमेशा जनसंपर्क में उनके साथ रहती हैं।

मुझे आशा ही नहीं, पूर्ण विश्वास है कि अगर क्षेत्र की जनता इन्हें अपना प्रतिनिधि चुनती है तो ये रोजगारमुखी विकास करेंगे तथा क्षेत्र के विकास के लिए समर्पित रहेंगे। कांग्रेस को पुन:स्थापित करने में ये उल्लेखनीय भूमिका भी निभाएंगे।

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