शारदीय नवरात्र पर मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालु भक्तों की भीड़

arun raj
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गोपालगंज से नमो नारायण मिश्रा:- शारदीय नवरात्र की शुरुआत मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना के साथ पूरे देश में धूमधाम से किया जा रहा है भक्तगण सुबह से ही पूजा अर्चना में जुटे है। इसी कड़ी में अहले सुबह से ही थावे मा भवानी के दरबार मे भक्तो का तांता लगा हुआ है। गोपालगंज जिला मुख्यालय से करीब छह किलोमीटर दूर सिवान जाने वाले मुखय मार्ग पर थावे नाम का एक स्थान है, जहां मां थावेवाली का एक अतिप्राचीन मंदिर है।
मां थावेवाली को सिंहासिनी भवानी, थावे भवानी और रहषु भवानी के नाम से भी भक्तजन पुकारते हैं। ऐसे तो साल भर यहा मां के भक्त आते हैं, लेकिन शारदीय नवरात्र और चैत्र नवरात्र के समय यहां श्रद्धालु भक्तों की भारी भीड़ लगती है।
मान्यता है कि यहां मां अपने भक्त रहषु भगत के बुलावे पर असम के कमाख्या स्थान से चलकर यहां पहुंची थीं।कहा जाता है कि मां कमाख्या से चलकर कोलकाता (काली के रूप में दक्षिणेश्वर में प्रतिष्ठित), पटना (यहां मां पटन देवी के नाम से जानी गई), आमी (छपरा जिले में मां दुर्गा का एक प्रसिद्ध स्थान) होते हुए थावे पहुंची थीं और रहषु के मस्तक को विभाजित करते हुए साक्षात दर्शन दिए थे। यह एक सिद्धपीठ स्थान है इस मंदिर के पीछे एक प्राचीन कहानी है।
पौराणिक कथाओ के मुताबिक राजा मनन सिंह हथुआ के राजा थे। वे अपने आपको मां दुर्गा का सबसे बड़ा भक्त मानते थे। गर्व होने के कारण अपने सामने वे किसी को भी मां का भक्त नहीं मानते थे। इसी क्रम में राज्य में अकाल पड़ गया और लोग खाने को तरसने लगे. थावे में कमाख्या देवी मां का एक सच्चा भक्त रहषु रहता था। कथा के अनुसार रहषु मां की कृपा से दिन में घास काटता और रात को उसी से अन्न निकल जाता था, जिस कारण वहां के लोगों को अन्न मिलने लगा, परंतु राजा को विश्वास नहीं हुआ।
राजा ने रहषु को ढोंगी बताते हुए मां को बुलाने को कहा। रहषु ने कई बार राजा से प्रार्थना की कि अगर मां यहां आएंगी तो राज्य बर्बाद हो जाएगा, परंतु राजा नहीं माने। रहषु की प्रार्थना पर मां कोलकता, पटना और आमी होते हुए यहां पहुंची राजा के सभी भवन गिर गए और राजा की मौत हो गई।
मां ने जहां दर्शन दिए, वहां एक भव्य मंदिर है तथा कुछ ही दूरी पर रहषु भगत का भी मंदिर है। मान्यता है कि जो लोग मां के दर्शन के लिए आते हैं वे रहषु भगत के मंदिर में भी जरूर जाते हैं नहीं तो उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है।
मंदिर के आसपास के लोगों के अनुसार यहां के लोग किसी भी शुभ कार्य के पूर्व और उसके पूर्ण हो जाने के बाद यहां आना नहीं भूलते। यहां मां के भक्तगण प्रसाद के रूप में नारियल, पेड़ा और चुनरी चढ़ाते है।
श्रद्धालुओ की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन के द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए है जगह जगह पर सुरक्षा बल की तैनाती की गई है,तो दूसरी तरफ तीसरी आंख भी जगह जगह पर लगाया है की किसी तरह को कोई भी उपद्रवी माहौल ना बिगाड़े ।
वहीं मंदिर प्रशासन के तरफ से भी पूजा अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था किया गया है।

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