पटना:- अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन के 21 वाँ द्वि दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन पारसनाथ में हुआ जिसमे 19 प्रदेशो से करीब 800 महिलाओं ने भाग लिया। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती नीरा बथवाल जी की अध्यक्षता में यह सम्मेलन आयोजित किया गया।मुख्य अतिथि प्रभा राकेश भैया और विशिष्ट अतिथि बेतिया की व्यंजना आनंद मिथ्या थीं।

बिहार प्रदेश और उसकी शाखाओं को सामाजिक कार्यों के लिए कुल 55 पुरस्कार मिले जो सर्वाधिक थे।
उत्कृष्ट प्रदेश अध्यक्ष का अवार्ड प्रांतीय अध्यक्ष नीना मोटानी बिहार प्रदेश को दिया गया। बिहार प्रदेश की राष्ट्रीय स्तर पर दिव्यलय साहित्यिक पाठशाला के संचालन के लिए अवार्ड,कैंसर जागरूकता कार्यक्रम के लिए अवार्ड, पत्तों से दोना प्लेट बनाने का प्रशिक्षण देने के लिए अवार्ड, शिक्षा समिति कोश के निर्माण से 3 लड़कीयों को छात्रवृति देने के लिए अवार्ड, राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के अध्यात्मिक उत्थान हेतु अवॉर्ड, घुटने का दर्द निवारण हेतु वेबीनार द्वारा महिलाओं का उपचार के लिए अवार्ड, राष्ट्रीय स्तर पर कैरियर काउंसिलिंग द्वारा बच्चो को मार्गदर्शन देने हेतु अवार्ड दिया गया।
सांस्कृतिक नाटक प्रतियोगिता (विषय भारत की वीरांगनाएं) में बिहार प्रदेश द्वारा अभिनीत नाटकआम्रपाली को द्वितीय पुरस्कार मिला।गोपी नृत्य रैली प्रतियोगिता में बिहार को तृतीय पुरस्कार मिला।
सबसे कर्मठ जुनूनी अध्यक्ष का अवार्ड श्रीमती केसरी देवी अग्रवाल पटना शाखा अध्यक्ष को दिया गया। बेतिया शाखा अध्यक्ष श्रीमती इंदिरा पोद्दार को श्रेष्ठ शाखा अध्यक्ष का पुरस्कार दिया गया।पटना शाखा और बेतिया शाखा को श्रेष्ठ शाखा का पुरस्कार दिया गया। गोशाला शेड निर्माण के लिए सीतामढ़ी शाखा , सर्वाधिक नवजात कन्या पूजन हेतु समस्तीपुर शाखा,शिशु मंदिर विद्यालय संचालन रक्सौल शाखा,घोंसला वितरण मोतिहारी शाखा,अंतर्जयोति नेत्रहीन विद्यालय में सहयोग पटना सिटी शाखा,अनवरत सेवा कार्य पटना शाखा,कैंसर जागरूकता शिविर मुजफ्फरपुर शाखा, सर्वाधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन पूर्णिया शाखा इत्यादि पुरस्कार दिए गए।
प्रांतीय अध्यक्ष श्रीमती नीना मोटानी जी द्वारा PPT के माध्यम से स्वर्गीय सुशीला मोहनका जी द्वारा बनाए गए अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन के इतिहास को दिखाया गया जिससे सभी सदस्यों को अपने सम्मेलन के बारे में जानकारी प्राप्त हुई कि कैसे और कब अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन की स्थापना हुई।
बिहार प्रदेश से 100 से ज्यादा बहनें पारसनाथ के राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल थीं।