पटना:- जद (यू0) प्रदेश प्रवक्ता श्री हिमराज राम ने सोशल मीडिया संवाद करते हुए कहा कि साल 2005 से पहले ऐसा दौर था जब बिहार की पहचान संकटों से घिरी हुई थी-प्रशासनिक शिथिलता, भ्रष्टाचार और अपराध का बोलबाला, विकास में ठहराव, सड़़कों-बिजली-शिक्षा में पूरी तरह अंधकार। लेकिन 2005 के बाद यह तस्वीर तेजी से बदली और मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने शासन को एक मिशन बनाकर बिहार को सुशासन की नई पहचान दिलाई।
आधारभूत संरचना के क्षेत्र में बिहार ने अभूतपूर्व क्रांति देखी। ग्रामीण सड़कों के व्यापक निर्माण और पुलों के तेज विस्तार ने राज्य की कनेक्टिविटी पर नया इतिहास रच दिया। हजारों किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कों का निर्माण और गंगा समेत कई प्रमुख नदियों पर नये पुलों के निर्माण ने बिहार के विकास को एक नई दिशा दी। बिजली सुधारों ने बिहार को अंधेरे से उजाले की ओर लेकर गया। जहाँ 2005 में प्रतिदिन केवल 2-4 घंटे बिजली मिलती थी, वहीं आज लगभग हर घर तक बिजली पहुँच चुकी है। राज्य ने 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की और बिजली उत्पादन तथा ट्रांसमिशन क्षमता में कई गुना वृद्धि की।
शिक्षा के क्षेत्र में भी बिहार ने क्रांतिकारी बदलाव देखा। लड़कियों की शिक्षा को सशक्त बनाने वाली साइकिल, पोशाक और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं ने स्कूल छोड़़ने की दर को न्यूनतम कर दिया। नए विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों की स्थापना ने भी उच्च शिक्षा को नई ऊँचाइयाँ दीं।
कानून व्यवस्था में सुधार ने बिहार को भय से भरोसे की ओर अग्रसर किया। संगठित अपराध में कमी, पुलिस आधुनिकीकरण, महिला थानों की स्थापना और त्वरित न्याय के लिए प्रभावी व्यवस्था ने लोगों में सुरक्षा की भावना बढ़़ाई। स्वास्थ्य सेवाओं में भी व्यापक सुधार हुआ। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सशक्त किया गया, डाॅक्टरों की नियुक्ति हुई, 102 और 108 एम्बुलेंस सेवाएँ शुरू की गईं, और बड़े अस्पतालों के विस्तार ने स्वास्थ्य ढाँचे को नई मजबूती दी।
महिलाओं के सशक्तिकरण के क्षेत्र में 50% आरक्षण ने स्थानीय निकायों में उनकी अग्रणी भूमिका सुनिश्चित की। जीविका दीदियों का माॅडल आज पूरे देश में सराहा जाता है, जिसने लाखों महिलाओं को आत्मनिर्भरता का मार्ग दिया। उद्योग, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में भी बिहार ने नए अध्याय लिखे। औद्योगिक नीति, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र एवं कृषि आधारित उद्योगों को बढ़़ावा देने के साथ-साथ स्टार्टअप नीति ने युवाओं को उद्यमिता से जोड़ा। कृषि रोडमैप के तीन चरणों ने सिंचाई, बीज, मंडी और तकनीकी बदलावों से कृषि को नई दिशा दी।
सुशासन के माॅडल ‘‘सात निश्चय’’ ने बिहार के विकास को गति दी-चाहे वह कौशल विकास हो, युवाओं के लिए रोजगार की व्यवस्था, शहरी सुधार, स्वास्थ्य, डिजिटल सेवाएँ या बुनियादी सुविधाओं का विस्तार। इसी प्रतिबद्धता का परिणाम है कि बिहार देश में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाले राज्यों में शामिल हो गया है। 2020-25 के कार्यकाल में जहाँ 20 लाख नौकरियों और रोजगार का वादा था, वहीं सरकार ने 50 लाख से अधिक अवसर प्रदान कर युवाओं की उम्मीदों को नई उड़ान दी।
नीतीश सरकार में बिहार ने विकास, विश्वास और बदलाव की लिखी नई कहानी – हिमराज राम