अतिपिछड़ा समाज महागठबंधन के झूठे झांसे में नहीं फँसने वाला – उमेश सिंह कुशवाहा

arun raj
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पटना :- महागठबंधन की ओर से घोषित ‘अतिपिछड़ा न्याय संकल्प’ को बिहार जदयू के माननीय प्रदेश अध्यक्ष श्री उमेश सिंह कुशवाहा ने राजनीतिक फरेब करार दिया और कहा कि बिहार का अतिपिछड़ा समाज महागठबंधन के झूठे झांसे में नहीं फँसने वाला है। बिहार की जनता भली-भांति जानती है कि केवल वादों से नहीं, बल्कि कार्यों से न्याय होता है। माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने जिस प्रतिबद्धता और निरंतरता के साथ अतिपिछड़ा समाज के लिए कार्य किए हैं, उसका 1ः भी कांग्रेस शासित राज्यों में दिखाई नहीं देता।

  उन्होंने कहा कि 2008 से 2025 के बीच अतिपिछड़ा कल्याण बजट 44 गुना बढ़ाया गया। वर्ष 2006-2007 में पंचायती राज और नगर निकायों में आरक्षण लागू कर अतिपिछड़ा वर्ग को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिया गया। मुख्यमंत्री अतिपिछड़ा उद्यमी योजना के तहत अब तक 10,000 से अधिक युवाओं को 10 लाख रुपये की सहायता दी गई है, जिसमें 5 लाख रुपये अनुदान है। इसके अलावा, राज्य के सभी जिलों में अतिपिछड़ा कन्या आवासीय विद्यालय संचालित हैं, जहाँ 7,000 से अधिक छात्राएं पढ़ रही हैं, जबकि जननायक कर्पूरी ठाकुर छात्रावास में 3,000 से अधिक बच्चे रह रहे हैं।

  श्री कुशवाहा ने कहा कि देश यह भी नहीं भूला है कि कांग्रेस ने लंबे समय तक मंडल आयोग की रिपोर्ट को दबाए रखा। जब वी.पी. सिंह ने इसकी सिफारिशें लागू कीं, तब पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने खुले तौर पर इसका विरोध किया। बिहार में ओबीसी आयोग का गठन माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने किया और देश में ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाने का कार्य माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने किया।

  उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि आजादी के बाद लंबे समय तक बिहार और देश में शासन करने का अवसर मिलने के बावजूद कांग्रेस और राजद ने अतिपिछड़ा समाज के लिए कौन-सा ठोस कदम उठाया?

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