दरभंगा :-नेपाल में हुई बारिश से दरभंगा स्थित कमला नदी के जलस्तर का बढ़ना। दो प्रखंड को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क का पानी में 20 फीट नीचे डूबना। इस सड़क के किनारे 15 फीट के गड्ढ़े। अब इस रोड को पानी में आधा डूब कर लोगों का पार करना और डर से कलेजा मुंह को आ जाना। यह भयंकर मंजर है किरतपुर प्रखंड क्षेत्र के झगरुआ-किरतपुर-रनपरती गांव को जोड़ने वाली मुख्य सड़क का। जहां गांव से बाहर निकलने के लिए एक मात्र यही सड़क है।
पिछले तीन दिन से यहां के हालात खराब हैं। इससे पहले स्थिति बिल्कुल सामान्य थी। इस सड़क से ही लोग दरभंगा मुख्यालय और सरकारी अस्पताल जाते हैं। इस सड़क पर 15 मिटर दूर तक पानी भर गया है। इससे इस क्षेत्र के करीब 10 हजार लोग परेशान हो गए हैं। क्योंकि इसमें से रोजाना कम से कम एक हजार लोग इस रोड को पार कर आगे का सफर तय करते हैं।
अब लोगों के पास मजबूरी यह है कि उन्हें नाव तक मुहैया नहीं कराया गया है। लोगों को घुटनों तक पानी को पैदल चलकर पार करना पड़ रहा है। इससे पूरा जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है ।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह करीब 3 किलोमीटर लंबी सड़क है। पर 15 मिटर दूर तक पानी भर गया है और तीन गांव का संपर्क पूरी तरह से जिला मुख्यालय से कट गया है। सड़क जमीन से 15 फीट ऊंची है। दोनों ओर भी पानी भरा है और उसका बहाव तेज है।
ऐसे में एक अंदाजे पर ही पानी भरे सड़क को पार करना पड़ रहा है। जरा सा भी पैर सड़क के किनारे इधर-उधर गया और डूब जाएंगे। छोटे बच्चों के लिए तो यह सड़क बिल्कुल जानलेवा बन गई है। उन्हें गोद में लेकर पार करना पड़ता है।
इस सड़क पर हर साल पानी भर जाता है और यहां के लोगों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट जाता है। नाव का ही एक सहारा होता है। पर इस बार अब तक एक भी नाव मुहैया नहीं कराई गई है। स्थिति यह है कि लोग जान जोखिम में डालकर सड़क पार करते हैं।
स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारियों के ध्यान नहीं देने के कारण लोगों को हर साल यह दंश झेलना पड़ता है। किरतपुर सरकारी अस्पताल जाने के लिए यह एक मात्र सड़क है। समय रहते अगर इसका समाधान नहीं निकाला गया तो बहुत परेशानी होगी। इस सड़क पर हर साल पानी आने के बाद लगभग 4 महीने लोगों को इसी परिस्थिति से गुजरना पड़ता है।
इधर, इस संबंध में बीडीओ यूसुफ सिराज ने बताया कि मामला संज्ञान में है। स्थल निरक्षण कराया जा रहा है, जिसके बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीण मोहम्मद अंसार ने बताया कि हम लोग अक्सर गांव से बाहर रहते हैं। साल में एक बार आना होता है। लेकिन इस बारिश के मौसम में यहां रहना मुश्किल हो जाता है। किसी चीज की जरूरत पूरी करने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
शाहिद ने बताया कि पानी आ जाने से डूबने का डर बना रहता है खासकर बच्चों का। इसका कोई साधन नहीं है और इसका कोई उपाय सरकार और प्रशासनिक व्यवस्थाओं द्वारा नहीं किया गया है। प्रत्येक दिन सड़क से 1000 यात्री सफर करते हैं। हर साल तीन से चार महीना ऐसी स्थिति में हम लोगों को रहना पड़ता है।
खेत के काम से लौट रही सुधा देवी बताती हैं कि यहां सबसे बड़ी समस्या यही है। यहां लोग डूब जाते हैं। तैर कर जाना पड़ता है। पिछली बार भी यहां पर लोग डूब गए थे। इसका कोई उपाय किसी द्वारा नहीं किया जाता है। तेज नदी की धार का पानी है। इसमें चलने में भी काफी कठिनाई होती है।
इस सड़क को क्रॉस करते वक्त अंसारुल का ट्रैक्टर बाढ़ के पानी में फंस गया। उन्होंने बताया कि जून आते-आते यहां पानी भर जाता है। अगस्त तक इसी स्थिति में रहना पड़ता है। स्थानीय मुखिया द्वारा इस सड़क पर गिट्टी वगैरा गिराया जाता है। लेकिन वह बाढ़ के पानी की धार के आगे टिक नहीं पाता है।